कुम्भ में डाक टिकट जारी करना गौरव की बात : मनोज सिन्हा

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Manoj Sinha

कुम्भनगरी (प्रयागराज), 02 फरवरी (वेबवार्ता)। केन्द्रीय संचार एवं रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने शनिवार को तीर्थराज की पुण्य भूमि पर स्मारक डाक टिकट जारी किया। इस दौरान सिन्हा ने कहा कि यह मेरे लिए गौरव की बात है। डाक टिकट राष्ट्र की संप्रभुता का प्रतीक है। कई बार बड़े आयोजनों पर डाक विभाग द्वारा डाक टिकट जारी होता रहा है।

मनोज सिन्हा ने कहा कि कुम्भ पूरे देश के लिए आकर्षण का केन्द्र है। इसलिए स्मारक डाक टिकट और स्मारिका जारी की गई। करोड़ों लोगों की कुम्भ में आस्था है। इस आयोजन को राज्य सरकार ने अविस्मरणीय बनाया है। डाक विभाग ने कई क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित किए हैं। पार्सल की शुरुआत डाक विभाग ने की है। तकनीकी का भी इस्तेमाल कर कोर बैंकिंग की शुरुआत की है। पासपोर्ट सेवा केन्द्र भी डाक विभाग में खोले गए हैं। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक से क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। आज एक लाख तीस हजार शाखाएं इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक खुले हैं। बीमा के क्षेत्र में भी डाक विभाग जल्द कदम रखने जा रहा है।

फिलेटिली में बच्चों की अभिरुचि बढ़े इसके लिए छात्रवृत्ति दी जा रही है। सिन्हा ने विमोचन के बाद मंच से कहा कि डाक टिकट किसी राष्ट्रीय का सिर्फ प्रतीक नहीं होता, बल्कि चित्रों के रुप में एक दूत की भूमिका का निर्वहन करता है। कुछ विशिष्ट आयोजनों, विशिष्ट व्यक्तिों, राष्ट्रीय और अन्तर राष्ट्रीय घटनाओं पर डाक विभाग स्मारक डाक टिकट जारी करता रहा है। सामान्य तौर पर पहले यह कोशिश होती थी कि इस तरह के आयोजनों से सरकार बचा करती थी, लेकिन नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली केन्द्र सरकार में देश की धार्मिक, सांस्कृतिक, पारम्परिक रूप से प्रसिद्ध घटनाओं, इतिहास के पन्नों में खो गए महापुरुषों के स्मृति में डाक टिकट जारी किए गए। कुम्भ मेला देश दुनिया के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है, इसलिए इस अवसर पर हमारे विभाग ने स्मारक डाक टिकट व प्रथम दिवस आवरण का विमोचन किया है।

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कुम्भ हिन्दू धर्म की एक धार्मिक तीर्थ यात्रा है। सामान्य रूप से हम सभी जानते हैं कि इसका आयोजन 12 वर्षों पर होता है। इस कथा को हर कोई जानता है कि जब सूर और असुरों का युद्धा हुआ था, उस समय भगवान विष्णु ने अमृत लेकर अपना रूप बदला और जब वे चले और असुर उनका पीछा किया तो उसकी कुछ बूंदे प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में कलश से गिरी। इन चारों स्थानों में प्रयागराज का सर्वोच्च स्थान है। इसलिए विश्वभर के तीर्थ यात्री आज यहां आ रहे हैं। जब मैं साल 1977 में हिन्दू विश्वविद्यालय का विद्यार्थी था, तब मैं रोडवेज से पहली बार कुम्भ स्नान के लिए आया था। साल 1977 से 2019 की यात्रा को देखकर के किसी भी भारतीय को गौरव की अनुभूति होगी। इस तीर्थ यात्रा में सभी की आस्था है, उसको उत्तर प्रदेश की सरकार ने विश्वस्तर पर बहुत बड़े आयोजन के रुप में किया है। इसलिए कुम्भ के इस अद्भूत मेले को यूनेस्कों की मानवता के अमूक सांस्कृतिक विरासत की मान्यता दी गई है। यह पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।

रेल राज्य मंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में डाक विभाग ने अनेक नए क्षेत्रों में अपना कदम रखा है। इसके पीछे प्रधानमंत्री की प्रेरणा और मार्गदर्शन सदैव सहायक रहा है। हमारी जो सबसे बड़ी विरासत थी, वो मैं मानता हूं कि डाकिये कि विश्वसनीयता रही है। डाकिया डाक लाया, यह गाना हर किसी ने जरूर सुना होगा। विज्ञान और इंटरनेट के अविष्कार के बाद डाक विभाग के सामने सामान्य तौर पर कई कठिनाईयां खड़ी हो गयी थी। इसलिए सरकार ने जौ फैसले लिए है। उसमें दो तीन काम हमारी सरकार ने किए है। देश में 2014 से पहले 77 पासपोर्ट केन्द्र थे, लेकिन अब वो 300 से ज्यादा हो गए हैं। अगले दिनों में देश के प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में एक पासपोर्ट केन्द्र की स्थापना की जाएगी।

इससे उस क्षेत्र का वासी अपने लोकसभा क्षेत्र में ही पासपोर्ट प्राप्त कर सके। यह लक्ष्य विदेश मंत्रालय और डाक विभाग ने मिल कर के लिया है। पुस्तक द सिटी ऑफ सेक्रीफाइस जर्नी थ्रू फिलैटिली का विमोचन के बाद उसके लेखक बंसल और सुनील राय का अभिनन्दन करते हुए कहा कि प्रयागराज बलिदान और त्याग का शहर है। फिलैटिली ने जो भी अच्छे काम किए हैं, उसका पुस्तक में विवरण है। पुस्तक को अभी मैंने केवल देखा है, इसलिए उसका विस्तार से विवरण नहीं कर सकता है। लेकिन उसको पढ़ने के बाद अपना विचार और प्रतिक्रिया लिखित रूप से प्रेषित करुगां।

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