इस बार 14 को नहीं मनेगी मकर संक्रांति, 15 को है पुण्य काल

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बेगूसराय, 11 जनवरी (वेबवार्ता)। इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 14 नहीं 15 जनवरी को मनाया जाएगा। सूर्य के मकर राशि में देर से प्रवेश करने के कारण ऐसा हो रहा है। पंडित आशुतोष झा ने बताया कि आमतौर पर 13 जनवरी की रात से 14 जनवरी की सुबह तक सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते थे जिसके कारण मकर संक्रांति का पुण्य काल 14 जनवरी को होता था।

लेकिन इस वर्ष सूर्य 14-15 जनवरी को 47 दंड सात पल पर यानी देर रात एक बजकर 39 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं जिसके कारण मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनायी जाएगी तथा पुण्य काल एवं सर्वार्थ सिद्ध योग दिन के 12 बजे तक है। वर्ष में 12 संक्रांतियां होती हैं लेकिन सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो वह सबसे खास संक्रांति होती है। सूर्य का मकर राशि में विचरण करना बहुत ही शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।

इस दिन तिल, गुड़, मूंग दाल एवं खिचड़ी का सेवन अति शुभकारी होता है। दैवीय संयोग से इस वर्ष मकर संक्रांति का पुण्य काल मंगलवार को पड़ता है, जो अति शुभ, समृद्धिकारी है। इसके साथ ही सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण हो जाएंगे तथा खरमास समाप्त हो जायेगा। शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात माना जाता है। सूर्य के उत्तरायण होने के बाद से देवों की ब्रह्ममुहूर्त उपासना का पुण्यकाल प्रारंभ हो जाता है। इस काल में देव प्रतिष्ठा, गृह-निर्माण, यज्ञ-कर्म आदि पुनीत कर्म किए जाते हैं।

इसके कारण ही हरिद्वार और प्रयाग में माघ मेला, मकर संक्रांति मेला, पूर्ण कुंभ या अर्द्धकुंभ का विशेष उत्सव प्रायोजित हुआ करता है। इस वर्ष भी प्रयागराज में कुंभ हो रहा है तथा प्रथम कुंभ स्नान 15 जनवरी को होगा। इस बार सूर्य के शत्रु ग्रह केतु पहले से ही मकर राशि में हैं जिसके कारण मकर संक्रांति का सभी 12 राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा लेकिन अधिकतर राशियों के लिए शुभ एवं फलदायी है। मान्यता है कि इस दिन सभी को सूर्योदय काल में स्नान कर तिल एवं गुड़ से संबंधित वस्तु खानी चाहिए। गंगा एवं नदी में स्नान से जहां पुण्य हजार गुणा बढ़ जाता है वहीं, किया गया दान महादान कहलाता है और अक्षय होता है। इसलिए साधु, भिखारी या बुजुर्ग योग्य पात्र को दरवाजा से खाली हाथ नहीं लौटना चाहिए। घर में लहसुन, प्याज, मांसाहारी भोजन तथा नशीले पदार्थ का भी उपयोग नहीं करना चाहिए।

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