स्वामी श्रद्धानन्द को मिलना चाहिए भारत रत्न का पुरस्कार -स्वामी प्रबोधनंद

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Swami Shraddhananda

हरिद्वार, 29 जनवरी (वेबवार्ता)। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के सीनेट हाॅल में गुरुकुल कांगड़ी छात्र कल्याण परिषद के एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए महामण्डलेश्वर स्वामी प्रबोधानन्द महाराज ने कहा कि अब तक अलग-अलग विधाओं में कार्य करने वाले मनीषियों को भारत रत्न से नवाजा गया है। किन्तु किसी भी सन्यासी को अलग-अलग विधाओं में काम करने वालों को भारत रत्न नहीं दिया गया है।

पिछले 70 वर्षो में किसी सन्यासी को इस तरह का उपहार न मिलना सन्त समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानन्द जी का योगदान देश की आजादी, शिक्षा और वैदिक संस्कृति को बचाने के लिए अद्भुत कार्य किया है। स्वामी श्रद्धानन्द महाराज जी ने देश में सबसे पहले शुद्धि आन्दोलन चलाया था। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में सबसे कार्य किया है। वैदिक शिक्षा को लेकर गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना की है। हिन्दूत्व समाज को जागृत किया है। जलियावाला बाग में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन की अध्यक्षता करने का साहस किसी नेता में नहीं था। उस समय पर स्वामी श्रद्धानन्द ने उसकी अध्यक्षता की थी। इस वीर स्वतंत्रता सेनानी प्रबुद्ध सन्यासी, शिक्षाविद् महर्षि दयानन्द के शिष्य स्वामी श्रद्धानन्द को भारत रत्न का पुरस्कार मिलना चाहिए।

विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो0 एम0आर0 वर्मा ने कहा कि स्वामी प्रबोधानन्द महाराज की मांग सर्वथा उचित है। वैदिक शिक्षा को लेकर स्वामी श्रद्धानन्द महाराज को भारत रत्न का पुरस्कार मिलना चाहिए। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो0 दिनेश भट्ट ने कहा कि देश आजाद होने से पहले शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले देश के पहले सन्यासी है, जिन्होंने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना की है तथा देश की आजादी में अपना योगदान दिया है। स्वामी श्रद्धानन्द महाराज को भारत रत्न मिलना चाहिए। प्रो0 दिनेश भट्ट ने कहा कि काशी विश्वविद्यालय की स्थापना गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के बाद हुई है। इसलिए वैदिक शिक्षा के क्षेत्र में स्वामी श्रद्धानन्द का योगदान अनुकरणीय है। इस अवसर पर छात्र संघ के सभी पदाधिकारी एवं छात्र उपस्थित रहे।

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