दिल्ली-एनसीआर में कबूतरों का आतंक

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-छत व चौराहों पर बैठे कबूतरों को दाना न डालें

(योगेश कुमार सोनी की विशेष रिपोर्ट)

नई दिल्ली, 10 फरवरी (वेबवार्ता)। दिल्ली-एनसीआर में लगभग हर चौरहे पर कबूतरों का दाना खिलवाने वाले लोग बैठे हैं। आप जब पैसे देकर उन लोगों से कबूतरों को दाना खिलवाते हैं तो आपको यह लगता है कि हमनें बहुत पुन का काम किया है लेकिन वो आप स्वयं को व अपने बच्चों का जान से मारने वाला कार्य कर रहे होते हैं।

दरअसल राजनधानी में लगातार इस तरह के मामलों की संख्या बढ़ रही है जिससे कबूतरों की बीट से होने वाली बदबू या कहें की उनमें से निकलने वाले विकारों से लोगों को कैंसर से भी घातक बीमारी हो रही है। ये सुनकर यकीन करना मुश्किल है लेकिन यह प्रमाणिकता के साथ सत्य है। दरअसल कबूतरों की बीट से लगभग एक किलोमीटर तक इसका प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा आपने देखा भी होगा कि पहले की अपेक्षा कबूतरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनकी संख्या बढ़ने का मुख्य कारण यह है कि चौराहों पर कबूतरों का दाना खिलाने वालें लोगों से पैसे लेकर दाना खिलाते है जिससे वहां दूर दराज से भी कबूतर आ रहे हैं।

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कबूतर लोगों के घरों के एसी पर जाकर बैठ जाते हैं, जिसकी वजह से एसी भी खराब होते हैं और इससे हवा में जहर भी घुलता है। कबूतरों की बीट से सांस लेने की तकलीफ बढ़ती है। शोध में बताया गया है कि कबूतर या किसी भी पक्षी का मल जब हवा में मिलता है तो यह हवा के जरिए फेफड़ों में पहुंच जाता है। लगातार गंदगी फेफड़ों में पहुंचने से फेफड़े सिकुड़ जाते हैं। इससे सांस लेने में तकलीफ होती है। इस बीमारी से निपटना मुश्किल है।

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पूर्वी दिल्ली के मानसरोवर पार्क में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कपिल सोनी ने बताया कि कबूतरों के मल से होने वाली जानलेवा बीमारी के बारे में वह लंबे समय से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। कबूतरों की बढ़ती संख्या से परेशान होकर कई लोग अपना घर भी छोड़ चुके हैं। लेकिन अब आपको कबूतरों से बचने के लिए अपनी सुविधानुसार उपाय करना चाहिए जिससे आप किसी घातक बीमारी की चपेट में न आ जाए।

दिल्लीवासी पहले से हवा में जहर ले रहे हैं। इसके साथ अब कबूतरों की बीट होने वाली बीमारी से भी लोग चपेट में आ रहे हैं लेकिन इससे बचना होगा वरन फेफडे सिकुडने के कारण आपकी जान भी जा सकती है। यदि आपके घर के आसपास कबूतर बैठता है तो उनका घौंसला न बनने दें व कबूतर की बीट को इक्कठा न होने दें। इसके अलावा चौराहें या छत पर कबूतर को दाना न डालें।

-डॉ. अनिल अरोड़ा, वरिष्ठ चिकित्सक, गंगाराम अस्पताल (दिल्ली)

Dr. Anil AroraDr. Anil Arora

 

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