हिवसल ब्लोअर को उल्टे घेरना आप पार्टी के दौहरे चरित्र का परिचायक-विजेन्द्र गुप्ता

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Vijendra Gupta

नई दिल्ली, 29 जनवरी (वेबवार्ता)। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी एवं दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने आज प्रदेश कार्यालय पर दिल्ली के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों का राजनीतिक दुरूपयोग करने व आम आदमी पार्टी के नेताओं एवं मंत्रियों का लोकायुक्त को संपत्ति का ब्यौरा न देने को लेकर संयुक्त प्रेस वार्ता की। इस प्रेस वार्ता में दिल्ली भाजपा के महामंत्री राजेश भाटिया, मीडिया प्रभारी प्रत्युष कंठ, सह-प्रभारी नीलकांत बख्शी व प्रमुख अशोक गोयल देवराहा उपस्थित थे।

पत्रकारवार्ता को सम्बोधित करते हुये मनोज तिवारी ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेताओं व मंत्रियों द्वारा दिल्ली के स्कूलों में चुनावी सभाओं का आयोजन करके दिल्ली के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों का राजनीतिक दुरूपयोग करने की कोशिश हो रही है। दिल्ली की जनता ने 67 सीटें देकर केजरीवाल को दिल्ली की सत्ता पर काबिज किया लेकिन निगम चुनावों में 272 सीटों में जब 67 सीटें भी आम आदमी पार्टी को नहीं मिली तो राजनीतिक हार को केजरीवाल सहन नहीं कर सके। 2017 के बाद देश के विभिन्न राज्यों में जहां भी चुनाव हुये हैं और आम आदमी पार्टी ने चुनाव लड़ा है, इन चुनावों में आम आदमी पार्टी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है और कई जगह तो उन्हें नोटा से भी कम वोट मिले हैं।

उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के आंतरिक सर्वे से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को पता चला कि दिल्ली के स्कूली छात्रों के जिन अभिभावकों का डाटा वो एकत्र कर रहे थे वे सभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आगामी चुनाव में मतदान करने वाले हैं यह जानकर केजरीवाल बुरी तरह हताश होकर स्कूल के मासूम बच्चों पर दबाव डालकर कहा कि वे अपने अभिभावकों को मोदी के खिलाफ मतदान करने के लिए कहें। इससे पता चलता है कि केजरीवाल अपना मानसिक संतुलन पूरी तरह खो चुके हैं और उनको ऊंची ईमारतों, मेट्रो स्टेशन और रेलवे स्टेशनों की पटरियों के नजदीक जाने से बचना चाहिये।

श्री तिवारी ने कहा कि 4 वर्षों के कार्यकाल में एक भी नया स्कूल नहीं बना और अब 4 वर्षों के बाद केजरीवाल 11000 कमरों का शिलान्यास करने जा रहे है, जिसके लिए उन्होंने कोई भी नये अध्यपाकों की नियुक्ती नहीं की, जब स्कूल में अध्यापक नहीं रहेगें तो छात्र कमरों का क्या करेगें। इससे पूर्व चुनाव आयोग ने केजरीवाल व आम आदमी पार्टी को दिल्ली के स्कूली छात्रों के अभिभावकों का डाटा मांगने को लेकर सख्त लहजे में मना किया था और जो डाटा एकत्र किया गया था उसे जब्त करने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्षा सुश्री अपराजिता गौतम के शिकायत पत्र जिसमें दिल्ली सरकार के नेताओं व मंत्रियों के खिलाफ बाल अधिकारों का अतिक्रमण व हानि पहुंचाने का आरोप है इस पर संज्ञान लेते हुये दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय को पत्र लिखकर कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सेक्शन 13(1) (आई) सीपीसीआर एक्ट, 2005 के अन्तर्गत छात्रों को स्कूल में स्वस्थ्य वातारण मिलना चाहिये और किसी भी तरह उनकी सुरक्षा को किसी भी प्रकार के जोखिम में नहीं डालना चाहिये। स्कूलों को चुनाव प्रचार का अड्डा नहीं बनाना चाहिये।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल हताशा व निराशा से घिरे हुये मानसिक रोग से पीड़ित हो चुके है बार-बार सवैंधानिक संस्थाओं पर हमला करके वह दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी की मान मर्यादा को भी कलंकित कर रहे है। दिल्ली की जनता ने आपको दिल्ली के विकास के लिए चुना था लेकिन आप केवल स्वार्थ प्रेरित राजनीति करके झूठ के दुष्प्रचार के माध्यम से जनता को गुमराह कर रहे है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेन्द्र गुप्ता ने आज कहा कि लोकपाल के समक्ष संपत्ति और व्यय के विवरण जमा न कराने पर अड़ी हुई आम आदमी पार्टी कानूनी और नैतिक दोनों ही दृष्टिकोणों से खोखली साबित हुई है। उन्होंने पूछा कि पारदर्शिता और सार्वजनिक जीवन में खुलेपन की दुहाई देने वाले मुख्यमंत्री केजरीवाल अब ब्यौरा जमा कराने से क्यों दूर भाग रहे हैं? उन्होंने लोकायुक्त के समक्ष सफाई क्यों नहीं दी? उन्होंने आम आदमी पार्टी का पक्ष लोकायुक्त के समक्ष क्यों नहीं रखा? आखिरकार लोकायुक्त से भागने के पीछे उनकी क्या मंशा है ? उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया रहस्यमय ढंग से क्यों चुप्पी साधे हुए हैं।

आप के मुखिया केजरीवाल को तो विवरण जमा करा ईमानदारी और पारदर्शिता का उदाहरण बनना चाहिए था। परन्तु वे सारे मुद्दे नदारद हैं और उनकी पार्टी हिवसल ब्लोअर को बचाने के बजाए उनकी जान के पीछे हाथ धोकर पड़ी है। इतना ही नहीं सारी आम आदमी पार्टी लोकायुक्त के विरोध में एकजुट हो गयी है। जब उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बिना मांगे अपनी आय का ब्यौरा जमा करा सकते हैं तो मुख्यमंत्री और उनके विधायकों को इससे परहेज क्यों। आप विधायक नहीं चाहते कि उनका भ्रष्टाचार सार्वजनिक हो। गत चार वर्षों में आप विधायकों की संपत्तियां और आमदनी जमीन से आसमान पहुंच गई है और आम आदमी पार्टी इस पर ढक्कन ढके रखना चाहती है।

विपक्ष के नेता ने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि अन्ना आंदोलन के दौरान जिस लोकपाल कानून की मांग दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कर रहे थे, उन्हीं केजरीवाल को अब लोकपाल और लोकपाल के नियमों की कोई परवाह नहीं है। कल निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद भी आप विधायकों ने अपनी संपत्ति को घोषित नहीं किया है। आम आदमी पार्टी उल्टे लोकायुक्त पर राजनीतिक दुर्भावना से ग्रस्त होने का आरोप लगाकर उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत चरित्रार्थ कर रही है। नियमों के अनुसार सभी विधायकों के लिए आवश्यक है कि वे अपनी संपत्ति को ब्यौरा लोकायुक्त के समक्ष जमा करायें। ईमानदारी और पारदर्शिता की दुहाई देने वाली आम आदमी पार्टी ने लोकायुक्त के आदेशों को दुर्भाग्यवश राजनीति से प्रेरित बताकर अपने ढोल की पोल खोल दी है।

श्री गुप्ता ने कहा कि आम आदमी पार्टी का जन्म लोकपाल के मुद्दे से ही हुआ था। वर्ष 2014 में केजरीवाल ने दिल्ली विधान सभा में विश्वासमत हासिल करने के बाद अपने संदेश में कहा था कि मजबूत लोकायुक्त बिल लाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब जब वर्ष 2019 में लोकपाल के लिए उनकी परीक्षा का वक्त आया तो एक बार फिर वे बुरी तरह फेल हो गए। भ्रष्टाचार के विरूद्ध उनकी मशाल पूरी तरह बुझ चुकी है। अब वे स्वयं भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गए हैं। सर्वोच्च व उच्च न्यायालय के न्यायधिशों के लिए यह अनिवार्य नहीं है कि वे अपनी संपत्ति का ब्यौरा जमा कराएं, परन्तु इसके बावजूद भी वे सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता के लिए ऐसा करते हैं। ऐसे में पारदर्शिता की दुहाई देने वाली आम आदमी पार्टी को पीछे हटना उसकी ईमानदारी और पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

Vijendra Gupta

नेता विपक्ष ने कहा कि जब लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य तथा दिल्ली नगर निगम जैसी स्वशासित संस्थानों के पार्षदगण अपनी अपनी संपत्ति और देनदारी का ब्यौरा जमा करा सकते हैं तो कोई कारण नहीं कि दिल्ली विधान सभा के सभी विधायक अपनी संपत्ति और देनदारी का ब्यौरा नहीं दें। उन्होंने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि एक ओर सांसद के रूप में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह तथा अन्य नेता नारायण दास गुप्ता और सुशील कुमार गुप्ता अपनी संपत्ति का ब्यौरा जमा करा सकते हैं तो दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अन्य मंत्री तथा विधायक अपनी संपत्ति का ब्यौरा जमा कराने से इंकार कर रहे हैं।

श्री गुप्ता ने कहा कि ईमानदारी और पारदर्शिता का दम भरने वाले आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को सत्ता में आते ही सबसे पहले स्वयं ब्यौरा जमा कराके अपने विधायकों के समक्ष उदाहरण पेश करना चाहिये था। परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया और न ही अपने किसी विधायक को ऐसा करने के लिये कहा। उन्होंने कहा कि अब जब लोकायुक्त ने नोटिस जारी कर ऐसा करने को कहा है तो इंकार करना अथवा उन पर आक्षेप लगाना केजरीवाल की बदनीयति का परिचायक है।

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