सही फुटवियर न चुनने से हो सकते है कई नुकसान

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कहते हैं कि एक सामान्य व्यक्ति अपने जीवनकाल में औसतन इतना चलता है कि वे पूरी पृथ्वी के तीन पूरे चक्कर काट सकता है। इससे सहज ही समझा जा सकता है कि हमारे पांवों पर कितना दबाव होता है। ऐसे में एक ओर जहां आधुनिक जीवनशैली पैरों को निशाना बना रही है, वहीं गलत फुटवियर पहनना सेहत को और बिगाड़ रहा है। फुटवियर चुनते समय पैरों की संरचना, उनकी लंबाई व तलवे का ध्यान रखना कितना जरूरी है।

शरीर के कुछ जटिल अंगों की संरचना में से एक हैं हमारे पैर, जो शरीर का भार उठाने और संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं। जिस तरह हम अपने कपड़ों को साइज, फैब्रिक, कलर और आराम के आधार पर चुनते हैं, उसी तरह फुटवियर के चुनाव में भी कई बातें ध्यान रखना जरूरी होता है। सही फुटवियर पहनना अंगूठे की हड्डी बढ़ने (बनियंस), कमर दर्द, घुटने में दर्द, पिंडलियों में दर्द, चाल खराब होने आदि कई शारीरिक परेशानियों से राहत दे सकता है। फुटवियर्स खरीदते समय पैरों की संरचना जैसे पैरों की लंबाई, पंजों की फैलावट और पैरों के तलुओं की गोलाई का ध्यान रखना जरूरी होता है।

इन बातों का रखें ध्यान:-

-आराम के समय पैरों के पंजे कुछ सिकुड़े रहते हैं और शरीर का वजन पड़ने पर ये लंबाई व चैड़ाई दोनों में फैलते हैं। जूते या चप्पल खरीदते समय उन्हें पहन कर दूर तक चल कर देखें।

-जूते शाम के समय लें, क्योंकि इस समय हमारे पैर सामान्य की तुलना में 8 प्रतिशत तक अधिक फैले होते हैं। फुटवियर्स न अधिक कसे हों, न अधिक ढीले।

-पैर की सबसे बड़ी उंगली और जूते की नोक में आधे इंच की स्पेस होनी चाहिए। जूते की नोक गोल या चैकोर लें, इससे उंगलियों को फैलने की पूरी जगह मिलती है।

-फुटवियर्स पैरों के आकार के नंबर के अनुसार लेने की बजाय पैरों की फिटिंग के आधार पर लें।

गलत जूतों से क्या हो सकता है:- मोर्टन न्यूरोमा एक दर्दनाक स्थिति है, जिसमें रोगी के पैर की तीसरी और चैथी उंगली के बीच सूजन, सनसनी, असहनीय दर्द, सुन्नता होती है, जो पैरों को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। मोर्टन न्यूरोमा ज्यादातर ऊंची एड़ी और कसे जूते पहनने वालों को होती है। यह समस्या गंभीर होने पर सर्जरी भी करनी पड़ सकती है। ऐसे में मरीज को चैड़े पंजे वाले जूतों के साथ सिलिकन से बने टो-सेपरेटर लगाने की सलाह दी जाती है, जिससे अंगूठे की हड्डी सीधी हो जाये।

बनियंस:- यानी अंगूठे के जोड़ की हड्डी बढ़ना, उन लोगों में अधिक होती है, जो कसे पंजे वाले जूते पहनते हैं। इससे अंगूठा पैरों की उंगली की ओर बढ़ने लगता है, जो सूजन और दर्द का कारण बन जाता है।

हैमर टो:- इसका मुख्य कारण भी गलत तरह के जूते पहनना है। नुकीले पंजों वाले जूते पहनने पर पंजे कसे रहते हैं और सीधे नहीं रह पाते तथा धीरे-धीरे नीचे की ओर मुड़ने लगते हैं। इससे पंजों के ऊपरी हिस्सों में घाव बन जाता है। रोगी को चैड़े व बड़े आकार के जूते पहनने को कहा जाता है।

फुट कॉर्न:- यानी पांव में कील निकलना अक्सर तलवों की त्वचा के घर्षण के कारण होता है। तलवे की बाहरी सतह पर जहां गलत जूते पहनने से दबाव पड़ता है, वहां की सख्त त्वचा इकट्ठी हो जाती है। इसमें दर्द भी हो सकता है। फूट कॉर्न का सबसे अधिक खतरा डायबिटीज, अर्थराइटिस और अधिक वजन वाले व्यक्तियों को होता है।

हैलक्स रिजिड्स:- इस रोग में अंगूठे की हड्डियों के जोड़ जाम हो जाते हैं, पैरों में दर्द बढ़ जाता है और सूजन आ जाती है। इसमें जूते के तलवों को थोड़ा अधिक मजबूत करते हैं। कभी-कभी सोल के अंदर स्टील की एक प्लेट भी लगाई जाती है। मधुमेह के रोगियों को खासतौर पर पैरों का ध्यान रखना चाहिए। गलत जूते पहनना पैर में घाव का कारण बन जाता है। इन दिनों शुगर के मरीजों के लिए खास तरह के जूते बाजार में हैं।

बिल्कुल फ्लैट चप्पलें भी न पहनें:- हर समय बिल्कुल फ्लैट चप्पल पहन कर रखना भी सेहत के लिए नुकसानदायक है। इससे पैरों की गोलाई को सहारा नहीं मिलता, जिससे एड़ियों पर अतिरिक्त दबाव बनता है और एड़ी में दर्द होने लगता है।

हील्स को कहें ना:- गलत फुटवियर पहनना पैरों के पंजों से लेकर शरीर के संतुलन को बिगाड़ सकता है, कमर और घुटने में दर्द का कारण बन सकता है। खासतौर पर लंबे समय तक हाई हील्स पहनना 95 फीसदी महिलाओं में कई शारीरिक परेशानियां पैदा कर देता है। अगर हील 1 से 1.5 इंच तक हो तो ठीक है, परंतु ऊंची हील्स के कारण पैर के मुड़ने से फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। लम्बे समय तक हील्स पहनने से घुटने कमजोर भी हो सकते हैं।

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