पेट्रोल चोरी पर सर्वोच्च न्यायालय का सख्त रुख

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Supreme court

-सईद अहमद

कलयुग अर्थात मशीनी युग में पेट्रोल और डीजल आमआदमी की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। इससे न तो उद्योग पति, किसान और आम इंसान कोई भी अछूता नहीं है। सभी की आवश्यकताएं पूरी भी हो रही हैं। पेट्रोल और डीजल आम और खास की जिन्दगी में इतना जरूरी हो गया है कि अगर इनकी कीमतों में 10 पैसे का भी इजाफा कर दिया जाता है तो कोहराम मच जाता है। लोग सड़कों पर उतर आते हैं, हद तक की सरकारें तक बदल दी जाती हैं। परन्तु जब आपको पता लगे कि पेट्रोल पम्प मालिक 10 पैसे नहीं 10 रुपए प्रति लीटर से अधिक का चूना लगा रहे हैं। तब आप पर क्या बीतेगी। जी हां देश के अधिकांस पेट्रोल पम्प आपको चूना लगा रहे है।

इस शातिर चोरी के लिए आमजन ने शोसल मीडिया पर अभियान भी चलाया। इस अभियान का न तो विभागों ने संज्ञान लिया और न सरकारों ने ही सुध ली। लेकिन एक ग्राहक की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को कार्यवाई करने का आदेश दिया हैं।

पुराने दौर में लोग घट तौली करते थे तो वह सामने दिखलाई पड़ता था, जिसे पकड़ना आसान भी था। जहां एक ओर मशीनी युग में मशीनों पर विश्वास पैदा हुआ उतना ही तकनीक का इस्तेमाल कर चोरी करने वालों ने चूना लगाने का रास्ता भी निकाल लिया। इसी चोरी से परेशान होकर एक जागरूक ग्राहक ने सर्वोच्च न्यायालय की शरण ली। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को समझते हुए केंद्र सरकार से इस बारे में जल्द से जल्द कदम उठाने को कहा है। याचिकाकर्ता ने पेट्रोल पंप पर माइक्रोचिप लगाकर हो रही धांधली को लेकर यह याचिका दायर की थी। पेट्रोल पंपों पर लोगों से पैसे तो पूरे लिए जाते हैं, लेकिन चालाकी से तेल कम दिया जाता है। इसके जरिए पेट्रोल पंप लाखों रुपये कमाते हैं। यूपी में कई पेट्रोल पंप पर चिप से तेल चोरी का खुलासा पिछले एक-दो साल में हो चुका है।

लेकिन जब तक सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाती तब तक धोखे से बचने के लिए कुछ ख़ास ख्याल रखना जरूरी है। क्योंकि आप पेट्रोल और डीजल डलवाते वक़्त आपकी नजर मशीन के मीटर पर होती है। बस इसी नजर का फायदा पेट्रोल कर्मी उठाते हुए आपको चुना लगाते है।

जरा गौर करे कि आप पेट्रोल पम्प पर गए और 500 रुपये का पेट्रोल डलवाया। 500 रुपये का पेट्रोल भरवाने में करीब 1 सवा मिनट का समय लगता है। आपका सारा ध्यान मीटर की रीडिंग पढ़ने में निकल जाता है और अगर इस बीच 10 सेकंड के लिए भी स्विच ऑफ होता है तो समझ लीजिए कि आपके 500 रुपये के पेट्रोल में करीब 40-90 रुपये का टांका यह शातिर लगा देते हैं।

petrol-pump

पेट्रोल पंप का नोजल आपकी गाड़ी के पेट्रोल/डीजल टैंक के अंदर जाता है और आप मीटर में सबसे पहले ‘0’ देखते हैं। इसके बाद आप जितने रुपये के पेट्रोल या डीजल की मांग करते हैं उतना जब तक मीटर दिखा नहीं देता, तब तक मीटर से नजर नहीं हटाते। इस बीच आपको पता ही नहीं चलता की मीटर तो चल रहा है, लेकिन आपकी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल जा रहा है या नहीं।

इसके अतिरिक्त इस बात का भी ख्याल रखे कि आप गाड़ी रिजर्व में आने से पहले ही पेट्रोल भरवा लें। बहुत कम लोग जानते हैं कि खाली टैंक में पेट्रोल भरवाने से नुकसान होता है। ऐसा इसलिए कि आपकी गाड़ी का टैंक जितना खाली होगा उसमें उतनी ही हवा मौजूद रहेगी, ऐसी स्थिति में अगर आप पेट्रोल भरवाते हैं तो पेट्रोल की मात्रा आपको थोड़ी कम मिलेगी। ऐसे में टैंक के रिजर्व में आने तक का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि उससे थोड़ा पहले ही पेट्रोल भरवा लेना चाहिए। बेहतर यह होगा कि आप अपनी गाड़ी का आधा टैंक हमेशा भरा रखें।

साथ ही आपको पेट्रोल उसी पंप से भरवाना चाहिए जहां डिजिटल मीटर वाला पंप लगा हो। ऐसा इसलिए क्योंकि पुराने पेट्रोल पंप मशीनों के जरिए आपकी गाड़ी में निश्चित मात्रा से कम मात्रा आने की संभावना ज्यादा रहती है। आप इसे धोखे को आसानी से पकड़ भी नहीं सकते हैं। इसलिए अगर आपने गौर किया हो तो देश में ऐसी मशीनों को लगातार हटाया जा रहा है और उनकी जगह डिजिटल मशीनें ले रही हैं। लेकिन एषा भी नहीं है कि सभी डिजिटल मशीनें पाक साफ़ है। जब देश में ईवीएम मशीनों पर ऊँगली उठ सकती है तो आप समझ सकते है कि इन मशीनों को हैक करना या चिप द्वारा एडजस्ट करना कोई मुश्किल काम तो नहीं होगा।

एक सावधानी और बरते कि अगर आपने कभी गौर किया हो तो कुछ पेट्रोल पंप पर मशीनों में गड़बड़ कर धांधली की जाती है। मसलन आपने पेट्रोल ऑर्डर किया हो और आपकी तरफ से बताई गई पेट्रोल की मात्रा के लिहाज से मीटर काफी तेज चल रहा हो तो समझ लीजिएगा कुछ गड़बड़ है। ऐसे में आप पेट्रोल पंप कर्मी से मीटर की स्पीड कम करने को कह सकते हैं।

फिलहाल इन चोरों से बचाने में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को जल्द कदम उठाने के आदेश तो दे दिए लेकिन सरकार कब चेतेगी देखना है।

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