डिजिटल इंडिया का सबसे मजबूत हिस्सा है तकनीकी शिक्षा : स्वाति खरे निगम

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किसी भी देश में शिक्षा के आधार पर उसका भविष्य तय होता है। यदि शिक्षा प्रणाली में कोई गड़बडी हो या संचालन में कोई कमी रह जाए या यूं ही कहें कि समय के साथ बदलाव न किया जाए तब भी देश की तरक्की में बाधा आ सकती है। इस विषय में विगत दिनों दिल्ली में भारत व इटली का ज्वाइंट वेंचर हुआ जिसको भारत व इटली के प्रधानमंत्रियों ने संबोधित किया। इस कार्यक्रम में देश-विदेश से शिक्षाविद आए थे। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में शामिल होने वाली अहमदाबाद से आई तकनीकी शिक्षाविद स्वाति खरे निगम से योगेश कुमार सोनी की खास बातचीत के मुख्य अंश।

Swati-Khare-Nigam

सम्मिट में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने किन विषयों को संबोधित किया।

दोनों देशों ने डीजिटल होने पर जोर दिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा नोटबंदी व जीएसटी जैसे निर्णयों के बाद देश की जनता ने डिजिटल इंडिया बनाने में बहुत सहयोग किया है। इस वजह से देशे में काला धन खत्म हुआ है व करप्शन पर भी लगाम लगी है। इटली के प्रधानमंत्री ने कहा इस क्षेत्र बहुत अभी बहुत काम करने की जरुरत है। इसके अलावा शिक्षा को भी तकनीकी रुप देने पर कई बातें कहीं।

शिक्षा से संबंधित बातें भी हुई। आप भी शिक्षाविद हैं। सम्मिट हुई बातों को आप इसे किस नज़रिये से देखती हैं।

देखिये हमारे देश में सबसे ज्यादा नौजवान हैं फिर बच्चे हैं। नई तकनीकियों को स्वीकार करना हमारी मजबूरी है क्योंकि यदि हम बच्चों व युवाओं यह सब नही सिखाएगें तो हमारे देश का भविष्य व तरक्की खतरे में पड़ सकती हैं। देश को इन्हीं दोनों वर्गों को संभालना हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डिजिटल इंडिया का सकारात्मक सपना देखा है जो बेहद काबिल-ए-तारिफ है क्योंकि अब डिजिटल युग है। समय के साथ चलना जरुरी है।

शिक्षा के क्षेत्र में आप इसको कैसे उपयुक्त समझती हैं।

हमें अभी बहुत कुछ बदलाव की जरुरत है। हमारे देश में शिक्षा प्रणाली अभी पुराने सिस्टम के हिसाब से चल रही है जिसके बदलाव के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। हमारे यहां आज 85 प्रतिशत शिक्षा पढ़ाई जाती है व 15 प्रतिशत प्रैटिक्ल के रुप में समझायी जाती है। अन्य देशों में शिक्षा यह सिस्टम विपरित है। जिसका सकारातमक परिणाम यह देखने को मिलता है कि कक्षा 8 में पढ़ रहा बच्चा कितनी क्रिएटिव चीजों का निर्माण कर देता है लेकिन हमारे देश में यह संभव नही। परंतु अब हम इस प्रणाली को अपनाते हुए देश को अग्रसरता की ओर ले जाना चाहते हैं जिस पर प्रधानमंत्री ने इसका समर्थन करते हुए प्रचार-प्रसार किया है। अब हमें इस प्रक्रिया को लाने व अपनाने की जरुरत है व मैं देश के सभी शिक्षाविद व अध्यपकों को यही कहना चाहूंगी कि यह क्षेत्र ऐसा हैं जहां बेईमानी नही करनी चाहिए। जितना बेहतर हो उतना करके तकनीकी शिक्षा को खुद भी ज्यादा से ज्यादा समझें व बच्चों को गंभीरता से समझाएं।

आपका अपना स्कूल हैं व आपने इस विषय पर किताबें व लेख भी लिखे हैं। किस तरह की प्रतिक्रियाएं आती हैं।

जी हां मैं आन्या इंटरनेशनल नाम से स्कूल संचालित करती हूं व मेरा पूरा प्रयास रहता है कि मैं स्कूल के बच्चों के सिवाय अन्य विधार्थियों को भी तकनीकी शिक्षा के लिए प्रेरित करते हुए इस ओर अग्रसर करने का बेहतर प्रयास करती हूं। मुझे लगता है कि बदलते स्थिति के हिसाब से शिक्षा प्रणाली को भी अपना लेना चाहिए। अब से दो दशक पूर्व पांच साल बच्चा स्कूल जाता था लेकिन अब दो वर्ष में ही स्कूल जाने लगा। पहले छठी कक्षा में अंग्रेजी पढ़ाने का प्रचलन था लेकिन अब प्ले स्कूल में ही बहुत कुछ सिखाया जाने लगा। इस ही तर्ज पर आगे की शिक्षा भी बेहतर बढ़ाने की जरुरत है।

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