प्रियंका मिशन के बाद कांग्रेस की न्यूनतम आमदनी योजना

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-अनवार अहमद नूर-    

देश एक बार फिर संसदीय आम चुनाव 2019 के द्वार आ खड़ा हुआ है और दो बड़ी राजनीतिक पार्टियां यानि कांग्रेस और भाजपा के अलावा कई दबंग क्षेत्रीय दल अपने आप को इस मैदान में हीरो साबित करने के लिए डटे हैं। इधर कांग्रेस पार्टी ने तीन विधानसभा चुनाव जीते उसके बाद अब प्रियंका गांधी को चुनावी रणक्षेत्र में उतार कर प्रियंका मिशन की घोषणा कर दी तो मोदी सरकार ने अपना अंतरिम बजट पेश करके कई लुभावनी घोषणाओं को देश के लोगों को ठीक चुनाव के समय परोसा, यह कशमकश जारी ही है कि अब कांग्रेस पार्टी की ओर से एक और नई घोषणा आ गयी है जिसने वाकई लोगों की दुखती रग को छुआ है और वह है कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का वादा कि अगर 2019 में कांग्रेस की सरकार बनी तो वह हर गरीब के खाते में एक निश्चित रकम जमा करेगी।

राहुल ने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह हर गरीब के लिए न्यूनतम आमदनी गारंटी योजना लागू करेगी। छत्तीसगढ़ में किसानों को धन्यवाद देने के लिए आयोजित किसान सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की कि हर गरीब के बैंक में न्यूनतम राशि जमा की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह देश में अपनी तरह की पहली योजना होगी जिसमें कोई सरकार गरीबों को न्यूनतम आमदनी की गारंटी देगी। इस तरह पार्टी ने अपना चुनावी एजेंडा साफ कर दिया है। राहुल ने बताया कि यह योजना यूपीए सरकार के समय लागू मनरेगा और आरटीआई जैसी योजनाओं की तर्ज पर बनेगी। कांग्रेस रणनीतिकारों का कहना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी चुनाव घोषणा पत्र में किए जाने वाले बड़े वादों का ऐलान करेंगे।

इन सभी ऐलानों को पार्टी अपने घोषणा पत्र में शामिल करेगी। ज्ञात रहे कि कई देश अपने नागरिकों के लिए न्यूनतम आय सुनिश्चित करते हैं। अगर किसी नागरिक की आमदनी न्यूनतम आय से कम है तो सरकार विभिन्न तरीकों से इस अंतर को पाटती है। फ्रांस उन देशों में है जिसने न्यूनतम आय की गारंटी योजना लागू की। अमेरिका के अलास्का प्रांत में सभी नागरिकों को आंशिक न्यूनतम आय दी जा रही है। कनाडा में 2017 में आंटोरिया प्रांत में लगभग 4000 लोगों पर प्रायोगिक तौर पर न्यूनतम आमदनी योजना लागू की गई। अन्य देशों में डेनमार्प, फिनलैंड, जर्मनी, आस्ट्रिया, आइसलैंड, लक्समेबर्ग जैसे देशों में दिव्यांगों, बुजुर्गों के लिए कई तरह के सामाजिक सुरक्षा कानून मौजूद हैं। यकीनन भारत में इस योजना को लागू करने में बहुत सारी समस्याएं आएंगी मगर राहुल गांधी ने यह घोषणा कर दी है क्योंकि जिन जिन देशों में इस प्रकार की योजना चल रही है उनकी आबादी कम है और उसमें भी यह योजना कुछ लोगों तक सीमित है।

भारत तो बहुत बड़ा देश है, बड़ी आबादी वाला देश है। करोड़ों में गरीबों को इस प्रकार पैसा देना, आखिर यह पैसा आएगा कहां से? पूर्व वित्तमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदम्बरम ने इसका उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि राहुल की घोषणा ऐतिहासिक है और यह गरीबों के जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में सार्वभौमिक न्यूनतम आय (यूबीआई) के सिद्धांत पर बड़े पैमाने पर चर्चा की गई है। अब समय आ गया है कि हमारे हालात और हमारी जरूरतों के मुताबिक इस सिद्धांत को अपनाया जाए और इसे गरीबों के लिए लागू किया जाए। हम कांग्रेस घोषणा पत्र में अपनी पूरी योजना बताएंगे। चिदम्बरम ने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच 14 करोड़ लोगों को गरीबी के चंगुल से बाहर निकाला गया। भारत से गरीबी का सफाया करने के लिए हमें दृढ़ता से कोशिश करनी होगी। देश के संसाधनों पर पहला अधिकार भारत के गरीबों का है। राहुल गांधी के वादे को लागू करने के लिए कांग्रेस पार्टी संसाधन जुटाएगी।

इस ऐलान के बाद माहौल गरमाया है कांग्रेस पार्टी की सरगर्मियां चारो ओर चली हैं देश के लोगों पर इसका प्रभाव भी यकीनन पड़ रहा है लेकिन चुनाव में यह प्रभाव कितना वोट में बदलता है अभी यह दूर की कौड़ी ही है क्योंकि राहुल यह योजना तभी लागू करने की सोच सकते हैं जब 2019 के चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आएगी। अभी तो फिलहाल इस पर जोर है कि मोदी चुनाव में फिर से न जीत पाएं। देश में बड़े पैमाने पर विपक्षी दल इसको लेकर सरगर्म हैं कोलकोता में हुई विशाल रैली और उसमें जुटा विपक्षी खेमा इस बात का प्रमाण है कि सभी इस चुनाव में अपना वर्चस्व साबित करना चाहते हैं।

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