फिल्म केदारनाथ पर रोक लगाने से उच्च न्यायालय का इन्कार

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High Court

नैनीताल, 06 दिसंबर (वेबवार्ता)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने विवादित फिल्म केदारनाथ के प्रदर्शन पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायाधीश रमेश चंद खुल्बे की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते कानून का हवाला देते हुए इसे सरकार के पाले में डाल दिया है।

सरकार चाहे तो अब इस पर वह कोई निर्णय ले सकती है। इसके साथ ही न्यायालय ने याचिका को पूरी तरह से निस्तारित कर दिया। सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया कि सरकार ने इस मामले की समीक्षा के लिए एक उच्च कमेटी का गठन किया है जो इस मामले की समीक्षा के बाद सरकार को रिपोर्ट पेश करेगी।

उच्च न्यायालय ने साफ कहा कि उसे फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने के मामले में कोई अधिकार नहीं है। इस मामले में अदालत में लगभग आधे घंटे बहस चली। इस बीच याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय को बताया गया कि यह हिन्दूओं की आस्था से जुड़ा हुआ मामला है और इससे कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है।

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इसके जवाब में उच्च न्यायालय ने कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति राज्य सरकार का मामला है। याचिकाकर्ता स्वामी दर्शन सिंह भारती और हरि कृष्ण किमोठी की ओर से पेश जनहित याचिका में कहा गया कि केदारनाथ हिन्दुओं की आस्था का केन्द्र है और भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंगों में से प्रमुख ज्योर्तिलिंग हैं। केदारनाथ को मोक्ष का धाम माना जाता है।

Kedarnath

फिल्म में केदारनाथ के इतिहास को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म से देश ही नहीं दुनिया में केदारनाथ को लेकर गलत संदेश जाएगा। इससे देश के विभिन्न हिस्सों में दंगे भड़कने की आशंका है। इसलिये सात दिसंबर को प्रदर्शित होने वाली फिल्म पर वर्तमान स्वरूप में प्रदर्शित करने पर रोक लगायी जाए।
उल्लेखनीय है कि इस मामले के गरमाने के बाद प्रदेश की त्रिवेन्द्र रावत सरकार ने पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया था। इस कमेटी में गृह सचिव नितेश झा, सूचना सचिव दिलीप जावलकर व प्रदेश के डीजीपी अनिल रतूड़ी को बतौर सदस्य शामिल किया गया है।

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