मानवता को शर्मसार करने की सबसे बडी समस्या एकल परिवार: माधुरी

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नई दिल्ली, 06 दिसंबर (वेबवार्ता)। देश दुनिया के इंसानों ने मशीनों का रूप धारण कर लिया है। काम की आपाधापी मे हम अपनों को खोते जा रहे है। जिससे देश-दुनिया और समाज के साथ खुद के लिए भी समस्याएँ पैदा कर रहे है।

उक्त वक्तव्य मदर्स आन व्हील्स की श्री मति माधुरी सहस्रबुद्धे ने भारतीय सांस्कृतिक सम्बंध परिषद मे प्रेस को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

श्रीमति माधुरी ने प्रेस को सम्बोधित करते हुए बतलाया कि बढते एकल परिवारों का चलन देश दुनिया के लिए चुनौती बनता जा रहा है। यह समस्या कुछ कम ज्यादा लगभग हर एक देश मे ही है।

एकल परिवार के चलन के ही कारण आश्रमों में बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है। वहीं काम की व्यस्तता की वजह से माता पिता अपने बच्चों को भी समय नहीं दे पाते है। जिसका सीधा असर बच्चों के मानसिक विकास पर पडता हैै। जिससे तीन पीढिया परेशान होती है।

श्री मति शीतल देशपांडे ने बतलाया कि हम लोगों ने जिन भी देशों का भ्रमण किया और वहां के परिवारों से बातचीत की तो सभी की समस्याएँ एक जैसी ही नजर आयी।
श्री मति उर्मिला जोशी ने बतलाया कि आज के युग में विकलांग और पशुओं के लिए तो हमदर्दी होती है लेकिन अपनों के लिए नहीं। अपनों के बिना या उनसे दूर रहकर हम भले ही आजादी मान ले दरअसल अपने लिए परेशानी बढाते है।
एक पूछे गए सवाल के उत्तर में कहा कि यात्रा से पहले ही हम अपना धर्म भूल गए थे। हम सिर्फ मांए है और मानवता के आधार पर ही समस्याएँ और संस्कृति को साझा किया। हमारा मकसद था कि एक परिवार में माता की भूमिका क्या होनी चाहिए। और माता की ही भूमिका क्यों होनी चाहिए।
जिसका जवाब है कि दिल से दिल का रिश्ता माता से ज्यादा होता है। विदित है कि मदर्स अॉन वहील्स कार्यक्रम के तहत चार भारतीय महिलाएँ 22 देशों की यात्रा पर थी। चारों महिलाओं ने 60 दिनों में 23600 किमी. का सफर तय कर 612 परिवारों से संवाद किया।

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