उत्तर प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर योगी सरकार के राजनीतिक एनकाउंटर हैं : एनसीएचआरओ

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नई दिल्ली, 20 जनवरी (अनवार अहमद नूर)। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद लगातार हो रही पुलिस मुठभेड़ों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में पीयूसीएल की तरफ से याचिका आ जाने के बाद योगी सरकार और उनकी पुलिस ने पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया बल्कि पीड़ितों और उनके परिवारों को डराने धमकाने और फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं।

हुई मुठभेड़ें पूरी तरह से फर्जी हैं और यह एनकाउंटर योगी सरकार तथा उनकी फासीवादी मानसिकता का परिणाम हैं जो चुनाव के लिए डराने धमकाने और प्रताड़ित करने की नीति का भाग है। यह विचार आज एनसीएचआरओ यानी नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स आर्गेनाइजेशन की ओर से आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रकट किए गए जो दिल्ली के प्रेस क्लब आफ इंडिया में आयोजित की गई। यहां मुख्य वक्ता के तौर पर प्रोफेसर अपूर्वानंद, अंसार इंदौरी एडवोकेट, रिहाई मंच के राजीव यादव, अकरम अख्तर चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार किरण शाहीन,पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के मुफ्ती शहजाद के अलावा पीड़ितों के परिवार जनों ने अपने अपने विचारों को प्रकट किया और अपने दर्द को पत्रकारों के समक्ष रखा।

सुमित गुज्जर के एनकाउंटर के बारे में बताते हुए उनके भाई ने कहा कि कोई मुकदमा कोई केस उनके भाई पर और न ही परिवार पर है लेकिन पुलिस ने उनको एनकाउंटर में मार दिया और ईनामी अपराधी बता दिया। पुलिस एनकाउंटर में मारे गए इरशाद जिसकी उम्र 15-16 साल बताई गई उसके पिता दिलशाद ने बताया कि उसके बेटे को पुलिस पूछताछ के लिए बुला कर ले गई और फिर उसका एनकाउंटर कर डाला। वक्ताओं ने कहा कि मुठभेड़ में अनेक तथ्य एसे हैं कि जो न सिर्फ सन्देह पैदा करते हैं बल्कि उनको फर्जी साबित करते हैं। पुलिस मुठभेड़ों में विशेष समुदाय और निम्न जातियों को निशाना बनाया जा रहा है।

पत्रकार के सवाल कि यह एनकाउंटर क्यों किए जा रहे हैं के उत्तर में किरण शाहीन ने उत्तर दिया कि योगी और उनकी एक मानसिकता के तहत यह सब कुछ सोची समझी रणनीति के अनुसार किया जा रहा है उन्होनें मुसलमानों सहित अन्य पिछड़े निम्न समुदायों का नाम लेकर कहा कि उनके खिलाफ यह एक राजनीतिक एनकाउंटर हैं जो उनमें डर पैदा करने और बूथ पर उनके खिलाफ मत न डालने के लिए पैदा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी के 19 नवम्बर के बयान पर संज्ञान लेते हुए एनएचआरसी ने नोटिस जारी किया था मगर उस नोटिस को भी योगी सरकार ने अपनी नीति का भाग बना कर उससे इंकार किया है कि हमें कोई नोटिस नहीं मिला है। वक्ताओं ने कहा कि पुलिस बेकसूरों को उठाकर पहले गोली मार देतीहै और बाद में उनके हाथ में बंदूक पकड़ा कर उसे एनकाउंटर का रूप दे देती है।

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