कितना खुशनसीब हूं कि इस मुल्क का मुसलमान हूं-सुनकर क्यों भावुक हुए अमिताभ बच्चन

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Faiz-Mohmmad-Khan
वेबवार्ता
KBC 10 : कौन बनेगा करोड़पति का 10 वां सीजन और रोमांचक होता जा रहा है। हाल ही में हॉट सीट पर मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के फैज मोहम्मद खान पहुंचे जिन्‍होंने अमिताभ बच्‍चन को एक कविता सुनाकर अभिभूत कर दिया।

मुंबई/होशंगाबाद, 26 सितंबर (वेबवार्ता)। कौन बनेगा करोड़पति यानी केबीसी के 10वें संस्करण को होस्ट कर रहे सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के सामने मंगलवार की रात को हॉट सीट पर बैठे मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के फैज मोहम्मद खान ने उनसे एक ऐसा अनुरोध किया जिसकी शायद बिग बी ने भी कल्पना नहीं की होगी। इस प्रतियोगिता से 12.50 लाख रुपये जीतने वाले फैज ने बच्चन साहब से गुजारिश की कि जैसे उन्होंने हनुमान चालीसा को अपनी आवाज दी है, वैसे ही वे नर्मदा अष्टक यानी मां नर्मदा की आरती को भी रिकॉर्ड करवाएं।

दरअसल, फैज जब होशंगाबाद से केबीसी में भाग लेने आ रहे थे तो उनके दोस्तों ने उन्हें नर्मदा अष्टक भेंट करते हुए कहा था कि वे बिग बी से इसे अपनी आवाज देने का आग्रह जरूर करेंगे। उन्होंने वैसा किया भी और अपनी एक्टिंग से लोगों के दिलों पर पिछले कई दशकों से राज कर रहे अमिताभ बच्चन ने अपने व्यवहार से भी सबको कायल कर दिया। उन्होंने बड़ी विनम्रता से कहा कि वे इसे रिकॉर्ड कराने की कोशिश जरूर करेंगे। इसी दौरान बिग बी ने यह भी बताया कि मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में उन्होंने गणेश वंदना को भी गाया है।

वैसे तो केबीसी के दौरान बिग बी प्रतियोगियों से काफी दिलचस्प बातचीत करते हैं, लेकिन कुछ-कुछ प्रतिभागी अपनी अलग छाप छोड़ जाते हैं। होशंगाबाद के फैज भी उनमें से एक हैं। फैज के नाना शायर थे और भोपाल की रियासत में मुंशी के पद पर तैनात थे। उनसे उनकी मां और मां से उन्होंने शायरी करना सीखी। फिलहाल वे किसी उस्ताद की तलाश में है। खास बात यह रही कि फैज की एक शायरी ने इस देश की गंगा-जमुनी तहजीब की याद ताजा कर दी। बिग बी ने कहा भी कि जब तक फैज जैसे नौजवान है इस देश की संस्कृति को कोई खतरा नहीं है। फैज के जिस शेर ने सबका ध्यान खींचा वह कुछ यूं हैः

“वक्त बेवक्त अपनी वफादारी का इम्तेहान हूं मैं,

दोस्तों में यारों में यारी का इम्तेहान हूं मैं.

नमाज की, रोजे की, अजान की पहचान हूं,

और कितना खुशनसीब हूं कि इस मुल्क का मुसलमान हूं…

मैंने अशफाक उल्ला से वतन पर मरना सीखा,

मौलाना कलाम से वतन के लिए कुछ करना सीखा.

और मेजर उस्मान की तरह हर हाल में वतन पर कुर्बान हूं,

कितना खुशनसीब हूं कि इस मुल्क का मुसलमान हूं.”

पेशे से टीचर फैज ने साढ़े 12 लाख जीतने के बाद गेम छोड़ दिया। 25 लाख रुपये के लिए अगला सवाल था कि किस संस्था को तीन बार नोबेल पुरस्कार मिला है। गेम छोड़ने के बाद फैज ने जो जवाब दिया वह बिल्कुल सही था। बता दें कि रेड क्रॉस संस्था को तीन बार नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया है। कार्यक्रम के दौरान फैज ने बताया कि वे गरीब बच्चों के लिए एक संस्थान खोलना चाहते हैं ताकि उन्हें भविष्य की जिंदगी की राह दिखा सकें।

नाना से मिली कविता लिखने की प्रेरणा

फैज के मुताबिक उनके नाना औबेदुल्ला खां भोपाल के नवाब की रियासत में मुंशी थे। औबेदुल्ला खां साहब की शायरी रियासत में काफी प्रसिद्ध थी। नाना साहब की लिखी शायरी और कविता का फैज ने अध्ययन किया तो उन्हें भी लिखने का शौक हुआ। समसामयिक घटनाक्रम से लेकर कौमी एकता पर वे कई कविताएं लिख चुके हैं।

मां का योगदान सबसे बड़ा

Faiz-Mohmmad-Khan With Mother
वेबवार्ता
फैज के मुताबिक कौन बनेगा करोड़पति तक पहुंचने का सफर उनके लिए चुनौती भरा रहा। मां हैदरा कौसर बेग ने मुझे प्रेरणा दी कि प्रयास किए जाएं तो किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है। फिर केबीसी के लिए तुम कोशिश क्यों नहीं करते। बस यहीं से सिलसिला शुरु हुआ मेरे प्रयासों का। जून 2018 में मेरा चयन केबीसी के लिए हुआ तो कॉल आया। पहले तो विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब केबीसी टीम के सदस्य घर आए और घर की लोकेशन शूट की, तब जाकर विश्वास हुआ कि सफल हो चुके हैं। इसके बाद केबीसी में विनर बनने का ख्वाब देखने लगा।

जीती गई रकम से कराएंगे विद्यार्थियों को तैयारी

फैज का कहना है कि केबीसी में साढ़े 12 लाख रुपए जीतने के बाद उनका सबसे बड़ा सपना है कि वे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए ऐसा प्लेटफार्म तैयार करेंगे, ताकि उन्हें सही मदद मिल सके। इसके अलावा कुछ राशि लोन चुकाने के लिए रहेगी। फैज ने इलेक्ट्रॉनिक्स से बीई की है। वर्तमान में वे होशंगाबाद के एक निजी संस्थान में व्याख्याता हैं।

फैज का परिचय

नाम – फैज मोहम्मद खान।

उम्र – 29 साल

पिता – सगीर मोहम्मद खान

माता – हैदरा कौसर बेग

शिक्षा – बीई इलेक्ट्रॉनिक्स

पता – बालागंज, होशंगाबाद।

लक्ष्य – प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए प्लेटफार्म तैयार करना, ताकि प्रतिभागियों को सही मार्गदर्शन मिल सके।

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